Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

रोटी अग्नि सेंकती या तवा ? सीधे अग्नि में नहीं ड़ालते हैं, ठण्डे तवे पर भी नहीं ड़ालते हैं, जिस तवे रूप व्यवहार में अग्नि रूप निश्चय ने प्रवेश कर लिया, उस पर रोटी ड़ालते हैं, जब रोटी तवे पर कुछ कड़ी हो जाती है तो फिर अग्नि में ड़ाल देते हैं, इसी प्रकार प्रारम्भ में व्यवहार का आलम्बन लिया जाता है, बाद में निश्चय प्राप्त होता है।

Does the fire bake the bread, or the griddle? One does not put it straight into the fire, nor on a cold griddle; one puts it on the griddle (the practical) which the fire (the absolute) has entered, and when the bread has firmed a little on the griddle it is then put into the fire — likewise at first the support of the practical is taken, and afterward the absolute is attained.

— आराध्य सूत्र · #18

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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