Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

नाव से नदी पार होते हैं, नाव में बैठने से कि नाव को छोड़ने से ? यदि छोड़ते हैं तो बीच में छोड़ दें तो भी नदी पार नहीं होगी, जब छोड़ना है तो बैठना क्यों ? बैठना भी पड़ेगा और उस पार पहुँचने पर छोड़ना भी पड़ेगा।

One crosses a river by boat — by sitting in the boat, or by leaving it? If you leave it midstream you will not cross; and if it must be left, why sit at all? You must both sit in it and, on reaching the far shore, leave it.

— आराध्य सूत्र · #7

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक