Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

कादाचित्को बन्धः, क्रोधादेः कर्मणः सदा सङ्गत्। नातः क्वापि कदाचित् परिग्रहवतां सिद्धिः।।

क्रोधादि से तो कभी-कभी कर्म बन्ध होता है, परन्तु परिग्रह से तो हमेशा पाप का बन्ध होता है, अतः परिग्रह धारियों को कभी मोक्ष नहीं होता है।

From anger and the like karma is bound only occasionally, but from possession there is always a binding of sin; therefore those who hold possessions never attain liberation.

— आराध्य सूत्र · #25

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति