Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

यस्य मोक्षेऽपि नाकाङ्क्षा, स मोक्षमधिगच्छति। इत्युक्त्वाद् स्वहितान्वेषी, काङ्क्षां क्वापि न योजयेत्।।

जिसकी मोक्ष में भी इच्छा नहीं वह मोक्ष पाता है ऐसा कहा गया है इसलिए आत्मार्थी किसी भी पदार्थ की इच्छा न करें।

It is said that one who has no craving even for liberation attains liberation; therefore the seeker of the self should not fix his desire on any object.

— आराध्य सूत्र · #34

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति