Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

अकिञ्चिनोऽहमित्यास्व, त्रैलोक्याधिपति भवेत्। योगी गम्यं तव प्रोक्तं, रहस्यं परमात्मनः।।

'मेरा कुछ भी नहीं है' ऐसा सोचकर बैठ जाओ तीन लोक के अधिपति हो जाओगे किन्तु यह योगियों के बस की बात है, मैंने तुम्हें परमात्मा बनने का रहस्य बताया है।

Sit down thinking 'nothing at all is mine' and you shall become lord of the three worlds; but this is within the power of yogis alone — I have told you the secret of becoming the Supreme Self.

— आराध्य सूत्र · #20

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति