बाह्य ग्रन्थ विहीनाः, दरिद्र मनुजाः स्व पापतःसन्ति। यः पुनरन्तः सङ्ग, त्यागी लोके सः दुर्लभः साधुः।।
दरिद्र मनुष्य पाप के उदय से बाह्य परिग्रह से रहित होते हैं किन्तु अन्तरङ्ग परिग्रह के त्यागी साधु लोक में दुर्लभ हैं।
Poor people are without outer possessions through the rise of their own sin; but a sadhu who has renounced inner attachment is rare in this world.
— आराध्य सूत्र · #19
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