Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

सम्बन्ध तीन प्रकार के- सांसारिक सम्बन्ध- माँ बाप का या जन्म से मरण तक चलने वाला सांसारिक सम्बन्ध है। सम्पादित सम्बन्ध- धन, पैसा, प्रतिष्ठा आदि का सम्पादित सम्बन्ध है। शाश्वत् सम्बन्ध- आत्मा का ज्ञान, दर्शन आदि से शाश्वत् सम्बन्ध है, पूर्व के दो सम्बन्ध छूट जाते हैं अतः हेय हैं।

Relationships are of three kinds: worldly — the bond of parents, lasting from birth to death; acquired — the bond of wealth, money, status and the like; and eternal — the soul's bond with knowledge, perception and so on. The first two relationships fall away and are therefore to be abandoned.

— आराध्य सूत्र · #14

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति