Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

त्याग तो किया पर रागादि कितना घटा? अलमारी साफ की पर ऐसे ढङ्ग से की, कि पानी अन्दर चला गया, पुस्तकें गल गयी, ऐसी सफाई ठीक नहीं, इसी तरह त्याग किया पर राग-द्वेष कम नहीं हुए तो ये वास्तविक त्याग नहीं है।

You renounced, but how much did attachment lessen? You cleaned the cupboard, but in such a way that water got inside and the books rotted — such cleaning is no good; likewise, if you renounce but attachment and aversion do not decrease, that is no real renunciation.

— आराध्य सूत्र · #18

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति