Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

पलितैक दर्शनादपि, सरति सतश्चित्तमाशु वैराग्यं। प्रतिदिनमितरस्य पुनः, सह जरया वर्धते तृष्णा।।

सिर के एक सफ़ेद बाल को देखकर सज्जनों को शीघ्र ही वैराग्य हो जाता है किन्तु दुर्जनों की जैसे-जैसे वृद्धावस्था आती है वैसे-वैसे तृष्णा बढ़ती जाती है।

At the sight of a single grey hair the mind of the good is at once seized by detachment; but as old age advances, the craving of the wicked only grows day by day.

— आराध्य सूत्र · #8

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति