Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

त्याग से नदी पार- एक साधु को नदी पार करना थी, नाविक ने पाँच रुपये माँगे, साधु ने कहा नहीं हैं, तभी एक व्यक्ति आया, उसने सोचा इनको भी पार करा देते हैं, नदी के बीच में साधु से व्यक्ति ने कहा, आप त्याग का बहुत उपदेश देते हो, अब मत देना, साधु ने कहा भैया जब पाँच रुपये का त्याग किया तभी तो नदी पार हुये, उसी प्रकार जब तक सम्पूर्ण त्याग नहीं करेंगे, तब तक संसार सागर से पार नहीं हो सकते हैं।

Crossing the river through renunciation: a sadhu needed to cross a river; the boatman demanded five rupees, but the sadhu had none. A man came and had him ferried across. Midstream the man said, 'You preach much about renunciation; now stop.' The sadhu replied, 'Brother, it was by renouncing five rupees that I could cross this river; likewise, until one renounces everything, one cannot cross the ocean of samsara.'

— आराध्य सूत्र · #15

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति