Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ज्ञान

मोहादिना निषिद्धे, श्रोतुः मन्द मतेरपि। सति प्राज्ञे विनीतेऽस्मिन्, यो व्याख्याति नराधमाः॥ भिन्न रत्नत्रयीयान, पात्रोऽसौ भूरिगौरवात्। विधूत बोधि संसार, वारिराशौ निमज्जति॥

जो अहङ्कारी अधम पुरुष मोह के कारण विनम्र एवं बुद्धिमान श्रोता के रहते हुए निषिद्ध मन्दबुद्धि श्रोता को व्याख्यान करता है, उसका रत्नत्रय रुपी जहाज भग्न हो जाता है और बोधि से रहित होकर संसार समुद्र में डूब जाता है।

The arrogant, base man who, out of delusion, lectures to a forbidden dull-witted listener while a humble and intelligent listener is present—his ship of the three jewels is wrecked, and, bereft of enlightenment, he drowns in the ocean of samsara.

— आराध्य सूत्र · #51

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