चरिया पमादबहुला, कालुस्सं लोलदा य विसयेसु। परपरितावपवादो, पावस्स य आसवं कुणदि॥
प्रमाद से भरी हुई प्रवृत्ति, कलुषता (कषाय की तीव्रता), विषयों की लोलुपता, दूसरों को पीड़ा देना और पर की निन्दा करना ये सब पाप आस्रव के कारण हैं।
Conduct full of negligence, impurity (intensity of passion), craving for the senses, tormenting others and slandering others—all these are causes of the influx of sin.
— आराध्य सूत्र · #34
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