Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

यह राग आग दहे सदा, तातें समामृत सेइए, चिर भजे विषय कषाय, अब तो त्याग निज पद बेइए। दाव मत चूको यह- ये महत्त्वपूर्ण वाक्य है, मौका मिला है तो आत्म हित कर लेना चाहिए, जैसे राजगृही में लिफ्ट लगी है, वह चलती रहती है, जो साहस करके बैठ गया तो ऊपर पहुँच जाता है, वरना इसी मौके के लिए प्रतीक्षा करना पड़ती है।

This fire of attachment ever burns, so partake of the nectar of equanimity; long you have served the passions of the senses—now renounce them and attain your own state. Don't miss the chance—this is an important saying: when the opportunity comes, secure your soul's welfare. Just as in Rajgruhi a lift is fitted that keeps running; whoever dares to get in reaches the top, otherwise one must keep waiting for the chance.

— आराध्य सूत्र · #3

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति