Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

येनैव देहेन विवेक हीनाः, संसार बीजं परिशेचयन्ति। तेनैव देहेन विवेक भाजाः, संसार बीजं परिशोषयन्ति॥

विवेकहीन जीव जिस देह से संसार बीज का सिञ्चन करते हैं, विवेकी जीव उसी देह से संसार बीज को सुखा देते हैं।

With the very body by which the undiscerning water the seed of samsara, the discerning dry up that seed.

— आराध्य सूत्र · #4

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक