Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

सेठ को मुक्ति चाहिए- एक सेठ भगवान् की प्रतिदिन भक्ति करता एवं भगवान् के कान में निवेदन करता, कि भगवान् मुझे मुक्ति चाहिए, एक दिन एक देव ने आकर उसकी परीक्षा की, और कहा कि हम आपको आज से दसवे दिन मोक्ष ले चलेंगे, सेठ ने कहा दसवे दिन क्यों? देव ने कहा दस दिन में आपके दस लड़कों का एवं दस कारखानों का वियोग होगा, आप हलके हो जायेंगे, तब हम आपको मोक्ष ले जायेंगे, सेठ ने कहा यह तो टेड़ी खीर है, हमारे गले में नहीं उतरेगी, कोई दूसरी किस्म का मोक्ष हो तो आप आना, अन्यथा कष्ट नहीं करना।

A merchant wants liberation: a merchant worshipped the Lord daily and whispered in the idol's ear, 'Lord, I want liberation.' One day a god came to test him and said, 'I shall take you to liberation on the tenth day from now.' The merchant asked why the tenth day. The god replied, 'In ten days you will be parted from your ten sons and ten factories; then, unburdened, I shall take you to liberation.' The merchant said, 'That is a tough pudding that won't go down my throat; if there is some other kind of liberation, come then, otherwise don't trouble yourself.'

— आराध्य सूत्र · #35

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति