Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

जैसे अपने आय-व्यय का विचार न करने वाला व्यापारी अन्त में पछताता है, उसी तरह जो साधु अपने दोषों का परिमार्जन नहीं करता, वह भी व्यापारी की तरह कष्ट उठाता है।

Just as a merchant who never reviews his income and expenses repents in the end, a monk who does not cleanse his own faults suffers like such a merchant.

— आराध्य सूत्र · #23

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक