Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

दुःखे णज्जइ अप्पा, अप्पा णाऊण भावना दुःखं। भाविय सहाव पुरुषो, विषयेषु विरज्जए दुःखं।।

आत्मा बड़ी कठिनाई से जानी जाती है, जान लेने के बाद भावना भाना कठिन होता है, आत्मा की भावना भाने वाले पुरुषों को भी विषयों से विरक्त होना कठिन होता है।

The soul is known only with great difficulty; after knowing it, to contemplate it is hard; and even for those who contemplate the soul it is hard to grow detached from sense-objects.

— आराध्य सूत्र · #17

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति