Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धर्म

ज्ञानं यत्र पुरस्सरं सहचरी लज्जा तपः सम्बलं, चारित्रं शिविका निवेशन भुवः स्वर्गा गुणा रक्षकाः। पन्थाश्च प्रगुणः शमाम्बु बहलश् छायादया भावना, यानं तं मुनिमापयेदभिमतं स्थानं विना विप्लवैः।।

जहाँ पर ज्ञान आगे है, लज्जा साथी है, तप का सम्बल है, चारित्र की पालकी है, ठहरने का स्थान स्वर्ग है, गुण रक्षक हैं, सरलता रुपी मार्ग है, समता रुपी घनी शीतल छाया है और दया की भावना है उस वाहन पर यात्रा करने वाले मुनि विना विघ्न के मोक्ष प्राप्त करते हैं।

Where knowledge goes ahead, modesty is the companion, penance the provision, conduct the palanquin, the heavens the resting places, virtues the guards, simplicity the road, equanimity the dense cool shade, and compassion the sentiment — the monk who journeys in that vehicle attains liberation without obstacle.

— आराध्य सूत्र · #16

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