यावत् स्वस्थमिदं शरीरमरुजं, यावज्जरा दूरतो, यावच्चेन्द्रिय शक्तिरप्रतिहतः, यावत् क्षयो नायुष। आत्म श्रेयसि तावदेव विदुषः, कार्यः प्रयत्नो महान्, सन्दीप्ते भवनं तु कूप खननं, प्रत्युद्घमः कीदृशः।।
जिस प्रकार घर में आग लगने पर कुँआ खोदने का प्रयत्न करना व्यर्थ है, उसी प्रकार जब तक शरीर स्वस्थ है, जब तक वृद्धावस्था दूर है, जब तक इन्द्रियों में क्षमता है और जब तक आयु क्षय नहीं हुई है, तब तक बुद्धि मान को आत्म कल्याण के लिए महान प्रयत्न कर लेना चाहिए।
As it is useless to try digging a well once the house is on fire, so while the body is healthy, old age is far off, the senses are strong, and life is not yet spent, the wise man should make a great effort for the welfare of his soul.
— आराध्य सूत्र · #14
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