Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

अवश्यं यदि नश्यन्ति, स्थित्वापि विषयाश्चिरं। स्वयं त्याज्या स्तथाहि स्यान्, मुक्ति संसृतिरन्यथा।।

चिर काल तक स्थिर रह कर भी विषय अवश्य ही नष्ट हो जाते हैं, यदि उन्हें स्वयं छोड़ दिया जाए तो मोक्ष प्राप्त होता है, यदि वे छूटते हैं तो संसार प्राप्त होता हैं।

Though they abide long, sense-objects are certain to perish; if one gives them up oneself, liberation is attained; if they leave you (by force), then samsara results.

— आराध्य सूत्र · #7

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति