Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जने जने न वैराग्यं, गृहे गृहे न सज्जनः। भवे भवे न सद्दृष्टिः, काले काले न शुद्ध धीः।।

जन-जन में वैराग्य नहीं होता, घर-घर में सज्जन नहीं होते, भव-भव में सम्यग्दर्शन नहीं होता और हमेशा बुद्धि शुद्ध नहीं होती है।

Not in every person is there detachment, not in every home a noble soul, not in every birth right faith, and not always is the intellect pure.

— आराध्य सूत्र · #3

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति