Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

स्पर्शन में हाथी, रसना में मछली, घ्राण में भौंरा, चक्षु में पतङ्ग, कर्ण में हिरण ये पाँचों जीव एक-एक इन्द्रिय के विषय में आसक्त होकर अपने प्राणों को खो देते हैं, फिर जो पाँचों इन्द्रियों के विषयों में आसक्त हैं उनका क्या होगा?

The elephant through touch, the fish through taste, the bee through smell, the moth through sight, the deer through sound — these five creatures lose their lives by attachment to a single sense; then what will become of those attached to all five senses?

— आराध्य सूत्र · #29

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति