रात्रिर्गमष्यिति भविष्यति सुप्रभातं, भास्वानुदेष्यति हसिष्यति पङ्कजश्री। एवं विचिन्त्यति कोषगते द्विरेफे, हा हन्त हन्त नलनिं गज उज्जहार।।
पराग को पीते-पीते कमल बन्द हो गया, भौंरा विचार करता है, रात्रि व्यतीत होगी सूर्य उदित होगा, कमल खिल जाएगा हम उड़ जाएंगे, इतने में हाथी आकर के कमलनि सहित उसे खा जाता है, इसी प्रकार संसारी प्राणी योजनाएँ बनाता रहता है और सोचता है कि इसके बाद आत्म कल्याण कर लेंगे बीच में ही यमराज रूपी हाथी खा जाता है।
As the bee sipped nectar the lotus closed; it mused, 'the night will pass, the sun will rise, the lotus will bloom and I will fly away.' Meanwhile an elephant came and ate it along with the lotus. So the worldly being keeps making plans, thinking 'after this I will attend to my soul,' but midway the elephant of Death devours him.
— आराध्य सूत्र · #9
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