Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धर्म

कृत्वा धर्म विघातं, विषय सुखान्यनुभवन्ति ये मोहात्। आच्छिद्य तरुन् मूलात्, फलानि गृह्लन्ति ते पापाः।।

जो मोही धर्म का विघात करके विषय सुख का अनुभव करते हैं वे पापी वृक्ष को जड़ से काटकर फल पाना चाहते हैं।

The deluded who destroy dharma to enjoy sensual pleasure are sinners who cut a tree from its root yet hope to gather its fruit.

— आराध्य सूत्र · #8

इसी विषय के और सूत्र

सभी धर्म →