यावज्जीवं सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्। भस्मी भूतस्य देहस्य, पुनरागमनं कुतो भवेत्।।
नास्तिक मानता है कि जब तक जीवन है तब तक सुख से जियो अगर धन न हो तो कर्ज लेकर घी पियो क्योंकि शरीर के जल जाने पर पुनः कहाँ से मिलेगा।
The atheist (Charvaka) holds: live in pleasure as long as you live; if you have no wealth, take a loan and drink ghee, for once the body is burnt to ash, where will it come again?
— आराध्य सूत्र · #5
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