Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जेसिं विसएसु रदी, तेसिं दुक्खं वियाण सब्भावं। जई तं णहि सब्भावं, वावारो णत्थि विसयत्थं।।

जिन्हें विषयों में रति है उन्हें दुःख स्वाभाविक जानो, क्योंकि यदि वह दुःख स्वाभाविक न हो तो विषयों में व्यापार न हो।

Know that suffering is natural to those attached to sense-objects; for if that suffering were not innate, there would be no craving after objects at all.

— आराध्य सूत्र · #4

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति