Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

अत्थि अणन्ता जीवा, जेहिं ण पत्तो तसाण परिणामो। भावकलङ्क सुपउरा, णिगोदवासं ण मुञ्चन्ति।।

ऐसे अनन्त जीव हैं, जिन्होंने आज तक त्रस पर्याय को प्राप्त नहीं किया, भावों की कलुषता के कारण वे निगोदवास को नहीं छोड़ते हैं।

There are infinite souls that have never yet attained the mobile state; because of the impurity of their dispositions they do not leave their dwelling in the nigod.

— आराध्य सूत्र · #18

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