सति सन्ति व्रतान्येव, सुनृते वचसि स्थिते। भवत्याराधिता सद्धि, जगत्पूज्या च भारती।।
सत्य वचन के होने पर ही शेष व्रत होते हैं और जगत्पूज्य जिनवाणी की आराधना होती है।
Only when truthful speech is present do the remaining vows exist, and the world-revered Jinvani is worshipped.
— आराध्य सूत्र · #22
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