एकतः सकलं पापं, असत्योत्थं ततोऽन्यतः। साम्यमेव वदन्त्यार्यास्, तुलायां धृतयोस्तयोः।।
तराजू के एक पलड़े पर चार पापों को रखा जाये और दूसरे पलड़े पर असत्य पाप को रखा जाए तो आचार्य दोनों को बराबर कहते हैं।
If four sins are placed on one pan of the scale and the sin of falsehood on the other, the acharyas declare the two equal.
— आराध्य सूत्र · #23
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