Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

पञ्चेन्द्रिय के चेतन विषय का राग और अचेतन पदार्थ के राग को लोभ कहा जाता है, शुभ राग को उदात्त प्रेम या वात्सल्य आदि नाम देते हैं।

Attachment to the conscious objects of the five senses and to insentient things is called greed; auspicious attachment is given names like noble love or affection.

— आराध्य सूत्र · #81

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति