Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

आगे-आगे पति जा रहा था और पीछे-पीछे उसकी पत्नी, रास्ते में सोने की मोहरें मिलीं, पति ने उस पर धूल डाल दी, ताकि पत्नी का मन न बिगड़ जाये, पीछे से आ रही पत्नी ने कहा क्या कर रहे हो, क्यों मिट्टी पर मिट्टी डाल रहे हो, अर्थात् पत्नी पति से ज्यादा निरीह थी क्योंकि उसकी दृष्टि में सोने और मिट्टी में भेद नहीं था।

A husband was walking ahead and his wife behind; on the road lay gold coins. The husband threw dust over them so his wife's mind would not be corrupted. The wife coming behind said, 'What are you doing? Why are you throwing dirt over dirt?'—meaning the wife was even more detached than the husband, for in her eyes there was no difference between gold and dust.

— आराध्य सूत्र · #78

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति