Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

विहाय ये निर्वृतिमव्यापायां, बहुव्यापायां वृणुते विभूतिं। हित्वा हिमं ते शुचि चन्दनाम्भः, पिबन्त्यपः मूढ़धियः सपङ्कः।।

आनन्द दायक मोक्ष को छोड़कर कष्टकारी सांसारिक विभूति को जो स्वीकार करते हैं, वे चन्दन युक्त जल को छोड़कर कीचड़ युक्त जल को पीते हैं।

Those who forsake blissful liberation and embrace troublesome worldly splendour are like fools who leave cool sandal-scented water and drink muddy water instead.

— आराध्य सूत्र · #56

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति