किमिराय चक्क तणुमल, हरिद्दराएण सरसओ लोहो। णारय तिरिय णरामर, देवेसुप्पायओ कमसो।।
पक्के रङ्ग की तरह जिसका लोभ होता है वह नरक गति में जाता है, रथ के चक्र के मल की तरह जिसका लोभ होता है वह पशुगति में जाता है, शरीर के मेल की तरह जिसका लोभ होता है वह मनुष्य गति में जाता है और हल्दी के रङ्ग की तरह जिसका लोभ होता है वह देवगति में उत्पन्न होता है।
One whose greed is like a fast dye goes to hell; one whose greed is like the grime on a chariot wheel goes to the animal state; one whose greed is like bodily dirt goes to the human state; and one whose greed is like turmeric's colour is born among the gods.
— आराध्य सूत्र · #53
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