Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

कर्मबध्नाति यज्जीवो, धनाशाकश्मलीकृतः। तस्य शान्ति र्यदिक्लेशाद्, बहुभिर्जन्म कोटिभिः।।

धन की आशा से मलिन चित्त जीव जो कर्म बांधता है, उसकी शान्ति करोड़ों जन्म की तपस्या से होती है।

The karma a soul binds when its mind is defiled by the hope of wealth is quelled only through austerity spanning millions of births.

— आराध्य सूत्र · #48

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