Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संतोष

समसंतोसजलेण य, जो धोवदि तिव्वलोहमलपुंजं। भोयणगिद्धि विहीणो, तस्स सउच्चं हवे विमलं।।

सन्तोष रूपी जल से जो लोभ रूपी मल को धोता है और भोजन में लालसा रहित होता है, वह शौचधर्म को प्राप्त होता है।

One who washes away the filth of greed with the water of contentment and is free of craving for food attains the pure dharma of purity (shauch).

— आराध्य सूत्र · #3

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