Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

मेरा देश महान, सौ में से सौ भगवान- एक बार द्रोणाचार्य ने धर्मराज युधिष्ठिर से सूची देकर कहा ! जाओ नगर में कितने दुर्जन हैं देखकर आओ और इसी प्रकार दुर्योधन को सूची देकर कहा ! जाओ नगर में कितने सज्जन हैं देखकर आओ, दोनों खाली सूची लेकर आ गये, धर्मराज बोले हमें एक भी दुर्जन नहीं मिला, और दुर्योधन बोले कि हमें एक भी सज्जन नहीं मिला, बस यही सकारात्मक और नकारात्मक दृष्टि-कोण में अन्तर होता है।

'My land is great, all a hundred out of a hundred are godly': once Dronacharya gave Yudhishthira a list and said, 'Go and find how many wicked people are in the city,' and gave Duryodhana a list to find how many good people were there. Both returned with empty lists. Yudhishthira said, 'I could not find a single wicked person,' and Duryodhana said, 'I could not find a single good person.' Just this is the difference between a positive and a negative outlook.

— आराध्य सूत्र · #126

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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