Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

अचेतनमिदं दृश्य, मदृश्यं चेतनं ततः। क्व रुष्यामि क्व तुष्यामि, मध्यस्थोऽहम् भवाम्यतः ॥5॥

दिखाई देने वाला अचेतन है, और जो चेतन है वह दिखता नहीं है, अतः किसी से राग-द्वेष न करके मैं मध्यस्थ होता हूँ।

What is visible is insentient, and what is sentient is invisible; therefore, feeling neither attachment nor aversion toward anyone, I remain equanimous.

— आराध्य सूत्र · #94

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति