Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धर्म

अन्नेन गात्रं नयनेन वक्त्रं, न्यायेन राज्यं लवणेन भोज्यं। धर्मेण हीनं वत् जीवितव्यं, न राजते चन्द्रमसः निशीथं ॥4॥

जिस प्रकार अन्न के विना शरीर, नेत्र के विना चेहरा, न्याय के विना राज्य, नमक के विना भोजन और चन्द्रमा के विना रात्रि की शोभा नहीं होती है, उसी प्रकार धर्म के विना जीवन की शोभा नहीं होती है।

As a body without food, a face without eyes, a kingdom without justice, food without salt, and night without the moon have no beauty, so life without dharma has no beauty.

— आराध्य सूत्र · #93

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