Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

आदहिदं कादव्वं, जं सक्कई तं परं पि कादव्वं। आदहिद परहिदादो, आदहिदं सुडुकादव्वं।।

अपना हित करना चाहिए व जितना बने पर का भी करना चाहिए, परन्तु अपने और पर के हित में आत्महित अच्छा करना चाहिए।

One should do one's own welfare, and as far as possible others' welfare too; but between self-benefit and benefiting others, self-welfare should be pursued well.

— आराध्य सूत्र · #3

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक