Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

कामक्रोधमदादिषु, चलयितुमुदितेषु वर्तनो न्यायात्। श्रुतमात्मनः परस्य च, युक्तया स्थितिकरणमपि कार्य।।

काम, क्रोध, मद आदि के द्वारा मोक्ष मार्ग से स्वयं अथवा दूसरों के चलायमान होने पर श्रुत एवं युक्ति के द्वारा स्थितिकरण करना चाहिये, धर्म में स्थित करना अधर्म में नहीं, अज्ञानी जन धर्म...

When, through lust, anger, pride and the like, oneself or others waver from the path of liberation, one should re-establish them by means of scripture and reasoning — establishing them in dharma, not in unrighteousness. (The ignorant...)

— आराध्य सूत्र · #2

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक