Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

दर्शनाच्चरणाद्वापि, चलतां धर्मवत्सलैः। प्रत्यवस्थापनं प्राज्ञैः, स्थितिकरणमुच्यते।।

सम्यग्दर्शन से अथवा चारित्र से चलायमान होने वालों को धर्मात्माओं के द्वारा फिर से उसी में स्थापित करना बुद्धिमानों ने स्थितिकरण अङ्ग कहा है।

Re-establishing, by the pious, those who waver from right-faith or from conduct back into it — this the wise call the limb of re-establishment (sthitikarana).

— आराध्य सूत्र · #1

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक