Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

अन्तरित- भूतकाल में हुए राम-रावण आदि या भविष्य में होने वाले तीर्थंङ्कर आदि अन्तरित पदार्थ कहलाते हैं, एवं दूरवर्ती- द्वीप समुद्र स्वर्ग-नरक आदि दूरवर्ती पदार्थ कहलाते हैं। ये आस्तिक्य गुण के विषय हैं।

Hidden (antarita) things are such as Rama, Ravana and others of the past, or the Tirthankaras and others yet to come in the future; and remote (duravarti) things are the far-off continents, oceans, heavens, hells and the like. These are the objects of the quality of conviction (astikya).

— आराध्य सूत्र · #7

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक