Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

व्रतादि क्रियाओं को करते हुए उनसे भोगों की इच्छा करना, कर्म और उसके फल में आत्मीय भाव रखना, अन्यदृष्टि प्रशंसा करना और काङ्क्षा रूप भाव मिथ्यात्व का चिन्ह है।

While performing vows and rites, desiring enjoyments from them, feeling a sense of ownership toward karma and its fruits, praising other (wrong) views, and any disposition of craving — these are marks of delusion.

— आराध्य सूत्र · #4

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक