सपरं बाधासहियं, विच्छिण्णं बन्धकारणं विसमं। जं इन्दियेहिं लद्धं, तं सोक्खं दुक्खमेव तहा।।
इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त होने वाला सुख पराधीन, बाधा सहित, अनियमित, बन्ध का कारण व हीनाधिक एवं दुःख रूप ही है।
The pleasure obtained through the senses is dependent, hindered, irregular, a cause of bondage, unequal, and is nothing but sorrow.
— आराध्य सूत्र · #3
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