Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

इह जन्मनि विभवादी, न्यमुत्र चक्रित्वकेशवत्वादीन्। एकान्तवाददूषित, परसमयानपि च नाकाङ्क्षेत्।।

इस लोक में वैभव आदि, परलोक में चक्रवर्ती का वैभव एवं एकान्तवाद से दूषित परमत की इच्छा नहीं करना निःकाङ्क्षित अङ्ग है।

Not craving prosperity and the like in this world, the splendour of a Chakravarti in the next, nor the false doctrines vitiated by one-sidedness (ekanta) — this is the limb of freedom from craving (nihkankshita).

— आराध्य सूत्र · #1

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति