Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

करोड़पति बाप का बेटा करोड़ रुपये का भान न होने से रोड़पति बना रिक्शा चला रहा था, पिता के मित्र से पता चलते ही रिक्शा वहीं छोड़ देता है, उसी प्रकार संसारी प्राणी को आत्मा की भगवत्ता पता न होने से विषय कषाय में सुख खोज रहा है। सम्यग्दृष्टि होते ही विषय-कषाय से विरक्त हो जाता है।

The son of a millionaire father, unaware that he owned crores, became a pauper pulling a rickshaw; the moment he learned the truth from his father's friend, he abandoned the rickshaw then and there. Likewise a worldly being, unaware of the divinity of his own soul, seeks happiness in the objects of the senses and passions; the moment he becomes a right-believer he grows detached from them.

— आराध्य सूत्र · #74

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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