Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

मोह को निद्रा की उपमा दी है जैसे स्त्यानगृद्धि निद्रा में व्यक्ति बड़े-बड़े काम कर लेता है पर उसे खुद होश नहीं रहता मैं क्या कर रहा हूँ अथवा शराबी की चेष्टाओं के तुल्य मिथ्यादृष्टि की चेष्टाएँ होती है।

Delusion is likened to sleep: just as in the deep somnambulant sleep (styanagriddhi) a person performs great feats yet is unaware of what he is doing, so the behavior of a wrong-believer is like the antics of a drunkard.

— आराध्य सूत्र · #73

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक