Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

जो क्षुद्र (नीच प्रकृति), रौद्र, रुष्ट, दूसरों का बुरा चाहने वाले, चुगलखोर, घमण्डी, ईर्ष्यालु, गायक, याचक, भण्ड वचन बोलने वाला, एवं जिसका दुष्ट स्वभाव है वह मिथ्यादृष्टि है।

One who is petty (base-natured), cruel, ill-tempered, wishing ill to others, a tale-bearer, arrogant, envious, a mere entertainer, a beggar, a speaker of vulgar words, and of wicked disposition is a wrong-believer.

— आराध्य सूत्र · #66

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक