Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

सात भय, सात व्यसन, पच्चीस दोष से रहित, संसार शरीर भोगों से विरक्त, आठ अङ्ग सहित सम्यग्दृष्टिपञ्च परमेष्ठी का भक्त होता है।

Free of the seven fears, seven vices and twenty-five faults, detached from worldly, bodily and sensual enjoyments, endowed with the eight limbs — such a right-believer is a devotee of the five Supreme Beings.

— आराध्य सूत्र · #64

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक