Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

आठ मद, तीन मूढ़ता, छः अनायतन, आठ शङ्कादि दोष, सात व्यसन, सात भय, पाँच अतिचार, इन चवालीस दोषों से रहित सम्यग्दृष्टि होता है।

Free of these forty-four faults — eight prides, three follies, six wrong shelters, eight faults beginning with doubt, seven vices, seven fears, and five transgressions — one is a right-believer.

— आराध्य सूत्र · #63

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक